न्यूजीलैंड में भारतीय छात्रों के लिए बड़े बदलाव: अब पढ़ाई के साथ मिलेगी 25 घंटे काम की मंजूरी और PR के नए मौके
New Zealand Student Visa : पिछले कुछ समय से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जैसे देशों ने अपने वीजा नियमों को काफी सख्त कर दिया है। ऐसे में विदेश जाकर पढ़ाई करने और वहां बसने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों, खासकर गुजरातियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के बाद अब न्यूजीलैंड शिक्षा और करियर के लिए एक ‘हॉट डेस्टिनेशन’ बनकर उभर रहा है।
आइए विस्तार से समझते हैं कि न्यूजीलैंड के इन नए नियमों से भारतीय छात्रों को क्या-क्या फायदे होने वाले हैं।
1. वर्किंग ऑवर्स में बढ़ोतरी: अब 20 नहीं, 25 घंटे कर सकेंगे काम
न्यूजीलैंड सरकार ने छात्रों के लिए काम करने की सीमा को 20 घंटे से बढ़ाकर 25 घंटे प्रति सप्ताह कर दिया है। सुनने में यह सिर्फ 5 घंटे का इजाफा लग सकता है, लेकिन अगर हम सालाना आधार पर देखें, तो यह एक छात्र की कमाई में बहुत बड़ा अंतर पैदा करेगा। इससे छात्रों को अपना रहने का खर्च निकालने में काफी मदद मिलेगी।
2. 118 सर्विस सेक्टर्स में करियर के नए द्वार
न्यूजीलैंड ने पहली बार 118 सर्विस सेक्टर्स की एक लिस्ट तैयार की है, जिसमें भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए रास्ते आसान किए गए हैं। इसमें आईटी, हेल्थकेयर, एजुकेशन और कंस्ट्रक्शन जैसे मुख्य क्षेत्रों के साथ-साथ योग इंस्ट्रक्टर और आयुर्वेदिक एक्सपर्ट्स को भी शामिल किया गया है। यह भारतीय संस्कृति से जुड़े कोर्सेज के लिए एक बहुत बड़ा ‘वेलकमिंग’ कदम है।
3. वीजा और PR की राह हुई आसान
विशेषज्ञों के अनुसार, न्यूजीलैंड में अब ‘ओपन अप’ पॉलिसी पर काम हो रहा है। इसके कुछ मुख्य आकर्षण इस प्रकार हैं:
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ऑनलाइन एप्लीकेशन: अब पेपर-बेस्ड एप्लीकेशन की जगह डिजिटल प्रोसेस शुरू हो गया है, जिससे वीजा प्रोसेसिंग तेज होगी।
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PSW (Post Study Work) का लाभ: छात्र अपना पोस्ट-स्टडी वर्क पहले से बुक कर सकेंगे, जिससे भविष्य की प्लानिंग आसान होगी।
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PR के लिए बेहतर विकल्प: पहले न्यूजीलैंड में पॉइंट-बेस्ड सिस्टम काफी कठिन था, लेकिन अब इसे सरल बनाया जा रहा है ताकि भारतीय टैलेंट को वहां के स्थानीय लोगों के बराबर वेतन और सुविधाएं मिल सकें।
न्यूजीलैंड: सांख्यिकी और भविष्य का लक्ष्य
डेटा के अनुसार, न्यूजीलैंड में भारतीय छात्रों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है:
| वर्ष | भारतीय छात्रों की संख्या | वृद्धि दर (2023 के मुकाबले) |
| 2023 | 7,930 | – |
| 2024 | 10,640 | 12.8% |
| 2025 (अनुमानित) | 12,000+ | 51% |
न्यूजीलैंड सरकार का लक्ष्य है कि 2034 तक विदेशी छात्रों से होने वाली आय को दोगुना किया जाए और सालाना लगभग 1.19 लाख वीजा जारी किए जाएं।
4. कनाडा और अमेरिका के मुकाबले न्यूजीलैंड क्यों बेहतर?
आजकल कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में लिविंग कॉस्ट (रहने का खर्च) आसमान छू रहा है। इसके विपरीत, न्यूजीलैंड में रहने का खर्च अभी भी स्थिर है। इसके अलावा:
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सॉफ्ट टैरिफ पॉलिसी: अमेरिका जहां व्यापारिक कड़ाई कर रहा है, वहीं न्यूजीलैंड ने ‘मेक इन इंडिया’ प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने के लिए टैरिफ में नरमी बरती है। इसका सीधा फायदा गुजरात के हीरा उद्योग और अन्य एक्सपोर्ट बिजनेस को मिलेगा।
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खुशहाल जीवन: वर्ल्ड हैप्पीनेस इंडेक्स में न्यूजीलैंड 12वें स्थान पर है, जबकि भारत 118वें पर। यह वहां की क्वालिटी ऑफ लाइफ को दर्शाता है।
5. कोर्स का चुनाव और वर्क परमिट
नए नियमों के तहत अब वर्क परमिट आपके कोर्स के लेवल पर निर्भर करेगा:
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लेवल 7 बैचलर डिग्री: 3 साल तक का वर्क वीजा।
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मास्टर्स डिग्री: 3 साल तक का वर्क वीजा।
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पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा: 1 साल का वर्क वीजा।
अब छात्रों को ‘ग्रीन लिस्ट’ की चिंता करने की जरूरत नहीं है, बल्कि वे अपने कोर्स के आधार पर सीधे वर्क परमिट की स्पष्टता पा सकेंगे।
निष्कर्ष
यदि आप विदेश में पढ़ाई के साथ-साथ एक स्थिर करियर और बेहतर लाइफस्टाइल की तलाश में हैं, तो न्यूजीलैंड इस समय सबसे बेहतरीन विकल्पों में से एक है। सरल ऑनलाइन प्रक्रिया, बढ़े हुए वर्किंग ऑवर्स और भारतीय कौशल (जैसे योग और आयुर्वेद) को दी जा रही प्राथमिकता इसे छात्रों के लिए एक सुनहरा मौका बनाती है।