Sakat Chauth 2026: संतान की लंबी उम्र के लिए सकट चौथ व्रत कथा और पूजा विधि

Goddess Parvati and Lord Ganesha sitting together for Sakat Chauth Puja illustration in cartoon style. सकट चौथ पर भगवान गणेश और माता पार्वती की पूजा का दृश्य - संतान सुख और सुरक्षा का प्रतीक।

Sakat Chauth 2026: संतान की लंबी आयु के लिए सकट चौथ व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथा और पूजा विधि

Sakat Chauth Vrat Katha हिन्दू धर्म में माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व है, जिसे हम सकट चौथ, संकष्टी चतुर्थी, तिलकुटा चौथ या वक्रतुंडी चतुर्थी के नाम से जानते हैं। यह व्रत मुख्य रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और उनके जीवन में आने वाले संकटों को दूर करने के लिए रखती हैं। मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की आराधना करने से भक्तों के सभी दुख “सकट” (संकट) पल भर में दूर हो जाते हैं।

सकट चौथ का महत्व: क्यों रखा जाता है यह व्रत?

सकट चौथ का व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि माँ की ममता और अटूट विश्वास का प्रतीक है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश ने अपने माता-पिता (भगवान शिव और माता पार्वती) की परिक्रमा कर अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय दिया था और प्रथम पूज्य कहलाए थे। यही कारण है कि इस दिन गणेश जी की पूजा करने से बुद्धि, विद्या और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।


सकट चौथ की पौराणिक व्रत कथाएं (Sakat Chauth Vrat Katha)

सकट चौथ के महात्म्य को समझने के लिए इसकी प्रचलित कथाओं का श्रवण करना अनिवार्य माना जाता है। यहाँ दो मुख्य कथाएं दी गई हैं:

1. कुम्हार और बालक की चमत्कारिक कथा

सतयुग में एक नगर में एक कुम्हार रहता था। एक बार उसके द्वारा बनाए गए मिट्टी के बर्तन ‘आवा’ (भट्टी) में पक ही नहीं रहे थे। परेशान होकर वह राजा के पास गया। राजा ने पुजारी से पूछा, तो पुजारी ने उपाय बताया कि हर बार आवा लगाते समय एक बालक की बलि देनी होगी।

एक बार एक वृद्ध महिला के इकलौते पुत्र की बलि की बारी आई। वह महिला सकट चौथ का व्रत रखती थी। उसने अपने बेटे को विदा करते समय भगवान गणेश की सुपारी और दूर्वा दी और उसे गणेश जी के भरोसे भट्टी में बैठा दिया। माँ के अटूट विश्वास का फल यह मिला कि जब अगले दिन भट्टी खोली गई, तो न केवल वह बालक जीवित और सुरक्षित था, बल्कि पहले दी गई सभी बलियों के बच्चे भी जीवित हो उठे। तभी से यह व्रत संतान रक्षा के लिए विख्यात हो गया।

2. माता पार्वती और शिवजी की कथा

एक पौराणिक प्रसंग के अनुसार, एक बार भगवान शिव और माता पार्वती नर्मदा तट पर बैठकर चौपड़ खेल रहे थे। इस खेल में हार-जीत का निर्णय करने के लिए उन्होंने मिट्टी का एक पुतला बनाकर उसे निर्णायक बनाया। खेल के अंत में उस बालक ने गलती से महादेव को विजयी घोषित कर दिया, जबकि माता पार्वती जीत रही थीं।

क्रोधित होकर माता पार्वती ने बालक को लंगड़ा होने का श्राप दे दिया। बालक के क्षमा मांगने पर माता ने कहा कि यहाँ गणेश पूजन के लिए कन्याएं आएंगी, उनसे व्रत की विधि पूछकर तुम गणेश जी की आराधना करना। बालक ने वैसा ही किया और सकट चौथ के व्रत के प्रभाव से वह फिर से स्वस्थ हो गया।


सकट चौथ पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)

यदि आप पहली बार यह व्रत रख रही हैं या पूजा की सही विधि जानना चाहती हैं, तो नीचे दिए गए चरणों का पालन करें:

प्रातः काल की तैयारी:

  • संकल्प: सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और लाल रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।

  • निर्जला व्रत: यह व्रत चंद्र दर्शन तक निर्जला (बिना पानी के) रखा जाता है, हालांकि स्वास्थ्य ठीक न होने पर फलाहार किया जा सकता है।

शाम की मुख्य पूजा:

शाम के समय एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।

  1. अभिषेक: गणेश जी को सिंदूर, अक्षत (चावल), लौंग और इलायची अर्पित करें।

  2. दूर्वा और फूल: गणेश जी को 21 दूर्वा की गांठें और लाल फूल चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

  3. नैवेद्य (भोग): इस दिन तिल के लड्डू (तिलकुटा), शकरकंद, अमरूद और गुड़ का भोग अवश्य लगाएं।

  4. कथा श्रवण: हाथ में तिल और गुड़ लेकर ऊपर बताई गई कथाओं का पाठ करें या सुनें।


चंद्र देव को अर्घ्य और पारण (Moonrise Timing)

सकट चौथ का व्रत तभी पूर्ण माना जाता है जब रात में चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाए।

  • अर्घ्य विधि: एक चांदी या तांबे के लोटे में जल लें, उसमें थोड़ा दूध, अक्षत और तिल मिलाएं। चंद्रमा के निकलने पर उन्हें देखते हुए जल अर्पित करें।

  • पारण: अर्घ्य देने के बाद गणेश जी की आरती करें और तिलकुटा का प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत खोलें।


पूजा सामग्री की चेकलिस्ट (Sakat Chauth Samagri)

अपनी पूजा की थाली में इन चीजों को शामिल करना न भूलें:

  • भगवान गणेश की तस्वीर या प्रतिमा

  • लाल कपड़ा और लकड़ी की चौकी

  • तिल और गुड़ (तिलकुटा बनाने के लिए)

  • शकरकंद, केला और मौसमी फल

  • गंगाजल, सिंदूर और दूर्वा

  • घी का दीपक और अगरबत्ती

निष्कर्ष

सकट चौथ का व्रत श्रद्धा और विश्वास का मार्ग है। यह दिन हमें सिखाता है कि संकट चाहे कितना ही बड़ा क्यों न हो, यदि हम धैर्य और भक्ति के साथ विघ्नहर्ता गणेश की शरण में जाते हैं, तो हर मुश्किल आसान हो जाती है।

https://gujaratitourister.in/2026/01/02/paush-purnima-2026-kab-hai-2-ya-3-january/

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