नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई फिल्म ‘हक’: शाह बानो केस से प्रेरित इस ड्रामा में यामी और इमरान की दमदार भिड़ंत
Haq Movie Netflix Release 2026 की शुरुआत बॉलीवुड प्रेमियों के लिए काफी धमाकेदार रही है। सिनेमाघरों में अपनी छाप छोड़ने के बाद, निर्देशक सुपर्ण एस वर्मा की चर्चित फिल्म ‘हक’ (Haq) आज, 2 जनवरी 2026 को नेटफ्लिक्स (Netflix) पर रिलीज हो गई है। यह फिल्म न केवल अपने पावरफुल अभिनय के लिए चर्चा में है, बल्कि इसकी कहानी भारत के एक ऐतिहासिक कानूनी मामले से जुड़ी है जिसने देश की राजनीति और न्याय व्यवस्था को हिलाकर रख दिया था।
क्या है फिल्म ‘हक’ की कहानी?
फिल्म की कहानी 1985 के ऐतिहासिक शाह बानो केस से प्रेरित है। इसमें यामी गौतम ने शाजिया बानो का किरदार निभाया है, जो एक साधारण गृहणी है। उसकी जिंदगी तब बदल जाती है जब उसका पति, एडवोकेट अब्बास खान (इमरान हाशमी), उसे ‘तीन तलाक’ देकर घर से निकाल देता है और दूसरी शादी कर लेता है।
शाजिया अपने और अपने बच्चों के हक के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाती है। वह अपने पति से गुजारा भत्ता (Maintenance) की मांग करती है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक घरेलू विवाद एक बड़े संवैधानिक और धार्मिक मुद्दे में बदल जाता है। जहाँ एक तरफ शाजिया अपने वजूद की लड़ाई लड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ उसके पति के रूप में इमरान हाशमी एक सफल वकील बनकर कानून की पेचीदगियों का इस्तेमाल करते हैं।
प्रमुख कलाकार और निर्देशन
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यामी गौतम (शाजिया बानो): एक ऐसी महिला जो समाज और कट्टरपंथियों के खिलाफ खड़े होने का साहस दिखाती है।
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इमरान हाशमी (अब्बास खान): एक ग्रे-शेड किरदार में, जो अपनी कानूनी समझ से शाजिया की राह मुश्किल बनाता है।
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शीबा चड्ढा और वर्तिका सिंह: ये दोनों कलाकार भी फिल्म में बेहद महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आए हैं।
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निर्देशन: सुपर्ण एस वर्मा, जिन्होंने इस संवेदनशील विषय को बहुत ही मैच्योर तरीके से पर्दे पर उतारा है।
विवादों के साए में ‘हक’
फिल्म की रिलीज से पहले यह कानूनी मुश्किलों में भी घिरी थी। शाह बानो की बेटी सिद्दीका बेगम ने निर्माताओं को नोटिस भेजा था। उनका आरोप था कि फिल्म के लिए उनकी सहमति नहीं ली गई और उनकी माँ की कहानी के कुछ पहलुओं को गलत तरीके से पेश किया गया है। हालांकि, इन विवादों के बावजूद फिल्म को क्रिटिक्स से काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
बॉक्स ऑफिस पर कैसा रहा प्रदर्शन?
नवंबर 2025 में जब यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई, तो इसे क्रिटिक्स ने ‘साल की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक’ बताया। हालांकि, कमाई के मामले में यह फिल्म उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतरी।
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बजट: लगभग 40 करोड़ रुपये।
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कुल कलेक्शन: भारत में करीब 19.86 करोड़ और वर्ल्डवाइड लगभग 29-30 करोड़ रुपये।
भले ही फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ‘कमर्शियल हिट’ नहीं रही, लेकिन अपनी गहरी कहानी और दमदार परफॉरमेंस की वजह से अब नेटफ्लिक्स पर इसे बड़ा दर्शक वर्ग मिलने की उम्मीद है।
क्यों देखें यह फिल्म?
अगर आपको ‘Sirf Ek Bandaa Kaafi Hai’ या ‘Article 15’ जैसी फ़िल्में पसंद आई थीं, तो ‘हक’ आपको निराश नहीं करेगी। यह सिर्फ एक तलाक की कहानी नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के अधिकारों, शिक्षा और न्याय के प्रति एक साहसी कदम की कहानी है।
शाह बानो केस का ऐतिहासिक संदर्भ और फिल्म का जुड़ाव
फिल्म ‘हक’ को बेहतर ढंग से समझने के लिए 1985 के उस दौर को समझना जरूरी है, जब भारत में शाह बानो केस ने कानूनी और राजनीतिक भूचाल ला दिया था। असल जिंदगी में, 62 साल की शाह बानो को उनके पति ने तलाक दे दिया था। जब उन्होंने गुजारा भत्ता मांगा, तो मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया, लेकिन तत्कालीन सरकार ने कट्टरपंथियों के दबाव में आकर कानून ही बदल दिया।
फिल्म ‘हक’ इसी कड़वे सच को आज के दौर के सिनेमाई पर्दे पर दिखाती है। फिल्म यह सवाल उठाती है कि क्या एक महिला की गरिमा और उसका अस्तित्व किसी भी व्यक्तिगत कानून (Personal Law) से ऊपर नहीं होना चाहिए? यामी गौतम ने शाजिया के किरदार के जरिए उस लाचारी और फिर उस लाचारी से पैदा हुई हिम्मत को बखूबी जिया है।
इमरान हाशमी: एक नए अवतार में
अक्सर ‘सीरियल किसर’ या रोमांटिक किरदारों के लिए पहचाने जाने वाले इमरान हाशमी ने पिछले कुछ सालों में अपनी इमेज को पूरी तरह बदला है। ‘हक’ में वह एक ऐसे वकील बने हैं जो कानून को अपनी उंगलियों पर नचाना जानते हैं। उनका किरदार पूरी तरह विलेन नहीं है, बल्कि वह एक ऐसे पुरुष की मानसिकता को दर्शाता है जो व्यवस्था का फायदा उठाना चाहता है। यामी और इमरान के बीच कोर्ट-रूम में होने वाली बहस फिल्म की जान है। संवाद इतने तीखे हैं कि वे दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देते हैं।
तकनीकी पक्ष और निर्देशन की बारीकियां
निर्देशक सुपर्ण एस वर्मा ने फिल्म को केवल एक अदालती कार्यवाही तक सीमित नहीं रखा है। उन्होंने शाजिया के घर के अंदर के घुटन भरे माहौल और बाहर समाज के तानों को भी बहुत संवेदनशीलता से दिखाया है। फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर तनाव पैदा करने में सफल रहता है। सिनेमाटोग्राफी में डार्क टोन का इस्तेमाल किया गया है, जो फिल्म के गंभीर विषय को और गहराई देता है।
OTT पर क्यों मिल रही है इतनी चर्चा?
अक्सर इस तरह की ‘सब्जेक्ट-ओरिएंटेड’ फिल्में सिनेमाघरों में उतनी भीड़ नहीं जुटा पातीं, क्योंकि लोग थिएटर में मनोरंजन और बड़े पर्दे का एक्शन ढूंढते हैं। लेकिन नेटफ्लिक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर दर्शक ऐसी कहानियों की तलाश में रहते हैं जो उन्हें कुछ नया सिखाएं या झकझोरें। यही कारण है कि ‘हक’ को डिजिटल प्रीमियर पर जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है। सोशल मीडिया पर लोग इसे ‘जरूर देखने वाली फिल्म’ बता रहे हैं।
समाज के लिए एक आईना
‘हक’ सिर्फ एक फिल्म नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक टिप्पणी है। यह दिखाती है कि कैसे आज के आधुनिक युग में भी महिलाओं को अपने बुनियादी अधिकारों (Fundamental Rights) के लिए अपनों से ही लड़ना पड़ता है। फिल्म का अंत कोई पारंपरिक ‘हैप्पी एंडिंग’ नहीं है, बल्कि यह एक नई शुरुआत की ओर इशारा करता है, जो दर्शकों के मन में कई सवाल छोड़ जाता है।
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