🌸 प्रस्तावना
भारत धर्म, परंपराओं और संस्कारों की भूमि है। यहाँ हर पर्व का एक विशेष महत्व होता है। इन्हीं में से एक अत्यंत शुभ पर्व है Tulsi Vivah , जिसे भगवान विष्णु और देवी तुलसी (वृंदा) के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है।
यह विवाह देवउठनी एकादशी से शुरू होकर कार्तिक पूर्णिमा तक किसी भी दिन किया जा सकता है। तुलसी विवाह को “देव विवाह” भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु अपने योगनिद्रा से जागकर संसार के कार्यों की पुनः शुरुआत करते हैं।
यह लेख आपको बताएगा — तुलसी विवाह कब और कैसे करें, इसे क्यों मनाया जाता है, इसके लाभ क्या हैं और इसके पीछे की पौराणिक कथा क्या कहती है।

🕉️ तुलसी विवाह 2025 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, तुलसी विवाह हर वर्ष कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से लेकर पूर्णिमा तक मनाया जाता है। इस पर्व की शुरुआत देवउठनी एकादशी से होती है।
📅 तुलसी विवाह 2025 की तारीख:
➡️ 4 नवंबर 2025, मंगलवार
🕗 शुभ मुहूर्त: सुबह 06:30 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक (स्थान अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है)
इस दिन भगवान विष्णु अपने योग निद्रा से जागते हैं, इसलिए इसे “देवउठनी” कहा जाता है।
जैसे ही भगवान विष्णु जागते हैं, उस दिन से शादी-ब्याह और मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है।
🌼 तुलसी विवाह क्यों किया जाता है?
तुलसी विवाह का आयोजन मुख्य रूप से भगवान विष्णु और देवी तुलसी (वृंदा) के विवाह के प्रतीक के रूप में किया जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति तुलसी विवाह करवाता है, उसे कन्यादान के समान पुण्य मिलता है।
इसके पीछे कई आध्यात्मिक और पारिवारिक कारण हैं:
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यह विवाह पवित्रता और भक्ति का संगम है।
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जो व्यक्ति इसे करता है, उसके जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और वैवाहिक आनंद बना रहता है।
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तुलसी विवाह के बाद ही हिंदू समाज में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है।
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यह पर्व स्त्री के सतीत्व और भक्ति की शक्ति का प्रतीक है।
🌿 तुलसी विवाह की पौराणिक कथा (Tulasi Vivah Story in Hindi)
बहुत समय पहले एक असुर राजा था — जालंधर। उसकी पत्नी का नाम वृंदा था।
वृंदा अत्यंत पतिव्रता और भगवान विष्णु की अनन्य भक्त थीं।
उनकी तपस्या और सतीत्व के प्रभाव से जालंधर अजेय बन गया था।
कोई भी देवता उसे युद्ध में हरा नहीं सकता था, क्योंकि वृंदा की पवित्रता उसकी शक्ति का स्रोत थी।
देवता जालंधर से भयभीत होकर भगवान विष्णु के पास गए और सहायता मांगी।
तब भगवान विष्णु ने जालंधर का रूप धारण करके वृंदा का पतिव्रत भंग कर दिया।
जैसे ही वृंदा को यह सच्चाई ज्ञात हुई, उन्होंने क्रोधित होकर भगवान विष्णु को शाप दिया —
“आपने छल से मेरा धर्म भंग किया है, इसलिए आप पत्थर बन जाएंगे।”
वृंदा के शाप से भगवान विष्णु शालिग्राम पत्थर बन गए।
वृंदा का शरीर वहीं भस्म हो गया, और उस स्थान से एक तुलसी का पौधा उत्पन्न हुआ।
भगवान विष्णु ने वृंदा से कहा —
“हे वृंदा, अब से तुम्हारा रूप पृथ्वी पर तुलसी के रूप में पूजित होगा। हर वर्ष मेरा विवाह तुमसे शालिग्राम स्वरूप में होगा।”
इस प्रकार से तुलसी विवाह की परंपरा शुरू हुई। यह विवाह वृंदा (तुलसी) और विष्णु (शालिग्राम) के पुनर्मिलन का प्रतीक है।
🌺 तुलसी विवाह कैसे करें? (Tulsi Vivah Vidhi in Hindi)
तुलसी विवाह की विधि अत्यंत सरल लेकिन अत्यंत पवित्र होती है।
इसे कोई भी व्यक्ति अपने घर में श्रद्धा और भक्ति से कर सकता है।
🔹 1. तुलसी विवाह की तैयारी
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तुलसी माता का पौधा विवाह से एक दिन पहले साफ करें और सजाएं।
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चौरा (तुलसी का स्थान) को धोकर हल्दी, चंदन और रोली से स्वस्तिक बनाएं।
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तुलसी को दुल्हन की तरह सजाएं – लाल चुनरी, फूलों की माला, चूड़ी और बिंदी लगाएं।
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भगवान विष्णु के शालिग्राम या प्रतिमा को दूल्हा बनाएं।
🔹 2. पूजा सामग्री
हल्दी, चावल, फूल, मिठाई, दीपक, तुलसी माला, नारियल, सुपारी, कुमकुम, घी का दीपक, कलश और वस्त्र आदि रखें।
🔹 3. विवाह संस्कार
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पहले भगवान गणेश की पूजा करें।
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तुलसी माता और शालिग्राम जी को आमने-सामने रखें।
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मंगल गीत गाएं और परिवार के सदस्य हर्षोल्लास से शामिल हों।
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तुलसी माता का कन्यादान करें — जल, फूल और अक्षत चढ़ाएं।
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मंगलसूत्र और फूलों की माला पहनाएं।
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तुलसी और शालिग्राम के सात फेरे करवाएं।
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अंत में आरती करें और प्रसाद बांटें।
🪷 तुलसी विवाह के दिन के विशेष नियम
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विवाह के दिन तुलसी को जल अवश्य अर्पित करें।
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तुलसी माता को लाल वस्त्र, बिंदी और सिंदूर चढ़ाएं।
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विवाह के बाद तुलसी माता को प्रसाद चढ़ाकर आरती करें।
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इस दिन कोई अशुभ कार्य या वाद-विवाद न करें।
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तुलसी के पौधे के पास लोहे या चमड़े की वस्तु न रखें।
🌻 तुलसी विवाह के लाभ
तुलसी विवाह करने से व्यक्ति को कई प्रकार के आध्यात्मिक और सांसारिक लाभ प्राप्त होते हैं।
✅ आध्यात्मिक लाभ
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भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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पिछले जन्मों के पाप नष्ट होते हैं।
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घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति आती है।
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यह विवाह करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
✅ सांसारिक लाभ
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विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं।
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दांपत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है।
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घर में धन, समृद्धि और सौभाग्य का वास होता है।
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इसे करने से कन्यादान के समान पुण्य मिलता है।
💫 तुलसी विवाह का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
तुलसी विवाह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह भक्ति, निष्ठा और स्त्री शक्ति का उत्सव है।
वृंदा का त्याग और सतीत्व हमें यह सिखाता है कि भक्ति की शक्ति किसी भी बुराई को पराजित कर सकती है।
यह पर्व भारतीय संस्कृति में विवाह संस्था के महत्व को भी दर्शाता है।
तुलसी विवाह के माध्यम से समाज में यह संदेश दिया जाता है कि हर संबंध में पवित्रता, निष्ठा और विश्वास आवश्यक है।
🪔 तुलसी विवाह और देवउठनी एकादशी का संबंध
तुलसी विवाह का आयोजन देवउठनी एकादशी से जुड़ा हुआ है।
चार महीने तक भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं — इसे चातुर्मास कहा जाता है।
इस अवधि में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता।
देवउठनी एकादशी को जब भगवान विष्णु जागते हैं, तब से शुभ कार्यों की शुरुआत होती है।
इसलिए तुलसी विवाह को शुभ मुहूर्तों का प्रारंभ भी माना जाता है।

🌿 तुलसी माता की विशेषता
तुलसी को “हरि प्रिय” कहा गया है।
भगवान विष्णु को तुलसी के बिना कोई भोग स्वीकार्य नहीं होता।
तुलसी का हर पत्ता पवित्र होता है और इसे घर में रखने से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
वैज्ञानिक दृष्टि से भी तुलसी का पौधा औषधीय गुणों से भरपूर होता है —
यह वातावरण को शुद्ध करता है, सांस संबंधी रोगों से बचाता है और मानसिक शांति प्रदान करता है।
🪶 तुलसी विवाह के बाद क्या करें?
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तुलसी विवाह के बाद तुलसी माता को प्रतिदिन दीपक जलाकर जल अर्पित करें।
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विवाह के अगले दिन तुलसी माता को मीठा भोग लगाएं।
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परिवार के सभी सदस्य मिलकर तुलसी की परिक्रमा करें।
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इस दिन का प्रसाद सभी को बांटें और गरीबों को दान दें।
🌼 निष्कर्ष
तुलसी विवाह न केवल एक धार्मिक पर्व है, बल्कि यह भक्ति, निष्ठा, प्रेम और जीवन की पवित्रता का प्रतीक है।
इस दिन भगवान विष्णु और देवी तुलसी के विवाह से पूरे संसार में शुभता और आनंद का वातावरण बनता है।
तुलसी विवाह हमें सिखाता है कि सच्ची श्रद्धा और प्रेम से किया गया हर कार्य फलदायी होता है।
जो व्यक्ति तुलसी विवाह करता है, उसके जीवन में कभी कमी नहीं आती और भगवान विष्णु का आशीर्वाद सदैव बना रहता है।
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