परवीन बाबी की विरासत पर ‘खूनी’ पंजा: जूनागढ़ में रातों-रात जमींदोज हुई 200 साल पुरानी हवेली, आखिर इसके पीछे कौन?
Parveen Babi Haveli : बॉलीवुड की ‘ग्लैमर गर्ल’ और अपने दौर की सबसे हसीन अदाकाराओं में शुमार परवीन बाबी आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें और उनकी विरासत आज भी उनके चाहने वालों के दिलों में जिंदा है। हालांकि, गुजरात के जूनागढ़ से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने न केवल परवीन के फैंस को बल्कि इतिहास प्रेमियों को भी झकझोर कर रख दिया है। जूनागढ़ के दिल में बसी परवीन बाबी की 200 साल पुरानी पुश्तैनी हवेली को रातों-रात मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया गया है।
इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह सिर्फ एक पुरानी इमारत का गिरना है, या फिर इसके पीछे किसी बड़े भू-माफिया का हाथ है? आइए, इस रहस्यमयी विध्वंस की पूरी कहानी को विस्तार से समझते हैं।
अंधेरे का फायदा और साजिश की गूँज
हैरानी की बात यह है कि इस विशालकाय हवेली को गिराने का काम किसी आधिकारिक नोटिस के बिना, बेहद ‘गुप्त’ तरीके से किया गया। स्थानीय लोगों और व्यापारियों के अनुसार, पिछले 12 से 15 दिनों से हवेली के आसपास के रास्तों को टीन के पत्तर लगाकर बंद कर दिया गया था। ऐसा माहौल बनाया गया जैसे कोई सरकारी मरम्मत का काम चल रहा हो।
काम करने का तरीका भी चौंकाने वाला था। विध्वंस की प्रक्रिया रात को शुरू होती थी और सुबह 5 बजते ही मशीनें और लोग गायब हो जाते थे। स्थानीय व्यापारी रिजवान सोरठिया ने बताया कि यह हवेली इतनी मजबूत थी कि 2 JCB और भारी क्रेनें भी इसकी कलात्मक कमान (Arch) को हिला नहीं पा रही थीं। अंत में, भारी तारों से खींचकर इसे गिराया गया।

करोड़ों की ‘नवाबी’ संपत्ति और कीमती सामान का गायब होना
यह मामला सिर्फ ईंट-पत्थर का नहीं है। इस हवेली में नवाबी काल के बेशकीमती पत्थर और करोड़ों की कीमत वाली सागवान की लकड़ी लगी थी। आरोप है कि हवेली ढहाने के बाद ट्रैक्टर भर-भर के यह कीमती सामान रातों-रात कहीं भेज दिया गया।
जब स्थानीय लोगों ने वहां काम कर रहे लोगों से पूछा, तो उन्हें डराया गया कि “हम नगर निगम (Corporation) से आए हैं, अगर दखल दिया तो पुलिस केस कर देंगे।” लेकिन जब सच सामने आया, तो हर कोई दंग रह गया।
सरकारी तंत्र की ‘चुप्पी’ और पल्ला झाड़ती एजेंसियां
इस पूरे मामले में सबसे रहस्यमयी पहलू प्रशासन का रवैया है। जब विवाद बढ़ा, तो जूनागढ़ नगर निगम के कमिश्नर तेजस परमार ने साफ कह दिया कि— “हमने यह हवेली नहीं गिराई है। हम सिर्फ जर्जर इमारतों को नोटिस देते हैं, लेकिन इस केस में हमारी तरफ से कोई कार्रवाई नहीं हुई।” दूसरी ओर, R&B (Road and Buildings) विभाग ने भी साफ कर दिया कि यह संपत्ति उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती। अब सवाल यह है कि अगर सरकार ने यह काम नहीं किया, तो भारी भरकम मशीनों के साथ सरेआम शहर के बीचों-बीच यह ‘ऑपरेशन’ करने वाले लोग कौन थे? किसके इशारे पर जूनागढ़ की इस ऐतिहासिक विरासत का कत्ल किया गया?

परवीन बाबी का जूनागढ़ से क्या था नाता?
परवीन बाबी का जन्म 4 अप्रैल, 1954 को जूनागढ़ के इसी बाबी परिवार में हुआ था। उनके पिता वली मोहम्मद खान बाबी जूनागढ़ के नवाब के अधीन कार्यरत थे। इतिहास बताता है कि नवाबी शासन के दौरान बाबी परिवार को कई गांव गरास (उपहार) में दिए गए थे। यह हवेली उसी दौर की गवाह थी।
आज जब इस हवेली को ढहाया गया, तो बाबी ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने मुंबई से जूनागढ़ आकर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत दी है। उनकी मांग है कि इस ‘सांस्कृतिक हत्या’ के पीछे जो भी गुनहगार हैं, उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाए।
क्या जूनागढ़ का इतिहास मिटाया जा रहा है?
स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी रोष है। लोगों का कहना है कि अगर इस हेरिटेज प्रॉपर्टी को रेनोवेट करके म्यूजियम या टूरिस्ट स्पॉट बनाया जाता, तो जूनागढ़ का नाम विश्व स्तर पर और चमकता। लेकिन इसे बचाने के बजाय, स्वार्थ के लिए मिट्टी में मिला दिया गया।
इस घटना से जुड़े कुछ अनसुलझे सवाल:
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बिना किसी परमिशन के 12 दिनों तक सड़क बंद कैसे रही?
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पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे से ट्रैक्टरों में भरकर कीमती सामान कैसे पार हो गया?
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क्या यह किसी बड़े जमीन घोटाले की शुरुआत है?
निष्कर्ष
परवीन बाबी की हवेली का ढहना सिर्फ एक इमारत का अंत नहीं है, बल्कि उस कला और इतिहास का अंत है जो आने वाली पीढ़ियों को जूनागढ़ की भव्यता की याद दिलाता। जनता अब इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रही है ताकि ‘नवाबी’ दौर की इस धरोहर के साथ इंसाफ हो सके।
https://gujaratitourister.in/2026/01/11/parveen-babi-life-story/
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