सजीवन सजना की महागाथा: अभावों के अंधेरे से वानखेड़े की रोशनी तक का वह ऐतिहासिक छक्का
भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसी कहानियाँ हैं जो हमें रोमांचित करती हैं, लेकिन केरल के वायनाड की पहाड़ियों से निकलकर आई सजीवन सजना (Sajeevan Sajana) की कहानी केवल रोमांच नहीं, बल्कि एक जीवंत चमत्कार है। यह कहानी एक ऐसी लड़की की है जिसने उस समय बल्ला थामा जब उसके पास पैरों में पहनने के लिए जूते तक नहीं थे। यह कहानी एक ऐसे पिता की है जिसने ऑटो चलाकर अपनी बेटी के सपनों को ईंधन दिया।
आज के इस विशेष लेख में, हम सजीवन सजना के जीवन के हर उस पहलू को करीब से देखेंगे, जिसने उन्हें ‘विमेंस प्रीमियर लीग’ (WPL) की सबसे बड़ी खोज बना दिया।

1. शुरुआती जीवन: वायनाड की मिट्टी और गरीबी का संघर्ष
Sajeevan Sajana सजीवन सजना का जन्म 4 जनवरी 1995 को केरल के वायनाड जिले में एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था। उनके पिता, सजीवन, एक ऑटो-रिक्शा चालक हैं, जो दिन-रात मेहनत करके परिवार का पेट पालते थे। उनकी माँ, शारदा, नगर पालिका में पार्षद रहीं, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति हमेशा चुनौतीपूर्ण बनी रही।
नारियल के पत्तों से क्रिकेट की शुरुआत
सजना का बचपन अन्य बच्चों की तरह खिलौनों के बीच नहीं बीता। जब उनके पास बैट खरीदने के पैसे नहीं थे, तब वह नारियल के पत्तों के डंठल (Matta) को काटकर उससे बैट बनाती थीं और प्लास्टिक की गेंद से खेतों में घंटों अभ्यास करती थीं। गाँव के लड़कों के साथ क्रिकेट खेलते हुए उन्होंने वह आक्रामकता सीखी, जो आज उनकी बल्लेबाजी में साफ झलकती है।
2. जब कुदरत ने ली परीक्षा: 2018 की भीषण बाढ़
सजना के करियर में एक समय ऐसा भी आया जब लगा कि सब कुछ खत्म हो गया। 2018 में केरल में आई विनाशकारी बाढ़ ने उनके घर को तहस-नहस कर दिया। उनका घर पानी में डूब गया और उनके पास जो थोड़े-बहुत क्रिकेट के सामान थे, वे भी नष्ट हो गए। उस समय उनके पास रहने को घर नहीं था और वे राहत शिविरों में रहने को मजबूर थीं। लेकिन सजना ने हार नहीं मानी। उन्होंने बाढ़ के पानी के उतरते ही फिर से बल्ला थामा और दोगुनी मेहनत शुरू कर दी।
3. घरेलू क्रिकेट में धाक और कप्तानी का सफर
सजना ने अपने पेशेवर करियर की शुरुआत केरल की महिला टीम से की। एक ऑलराउंडर के रूप में उनकी प्रतिभा जल्द ही सबके सामने आ गई।
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एक निडर नेतृत्व: सजना ने केरल की सीनियर महिला टीम की कप्तानी की। उनकी कप्तानी में केरल ने कई बार बड़ी टीमों को धूल चटाई।
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ऑलराउंड प्रदर्शन: वे केवल एक पावर-हिटर ही नहीं, बल्कि एक चतुर ऑफ-स्पिनर भी हैं। घरेलू क्रिकेट के मैचों में उन्होंने कई बार अपनी गेंदबाजी के दम पर मैच का पासा पलटा है।
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साउथ जोन और इंडिया-ए: घरेलू स्तर पर लगातार अच्छे प्रदर्शन के कारण उन्हें साउथ जोन और इंडिया-ए की टीमों में भी जगह मिली, जहाँ उन्होंने राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा।
4. WPL 2024 की नीलामी: किस्मत का दरवाजा खुला
साल 2023 की नीलामी सजना के लिए खाली रही थी, जिससे वे थोड़ी निराश थीं, लेकिन 2024 की नीलामी ने उनकी जिंदगी बदल दी। जब मुंबई इंडियंस ने उन पर 15 लाख रुपये की बोली लगाई, तो सजना की आंखों में आंसू थे। यह केवल एक अनुबंध नहीं था, बल्कि उनके पिता के बरसों के संघर्ष का फल था। अब उन्हें दुनिया के सबसे बेहतरीन कोचों और खिलाड़ियों के साथ काम करने का मौका मिलने वाला था।
5. वह एक छक्का जिसने इतिहास रच दिया
23 फरवरी 2024 की रात को कोई नहीं भूल सकता। WPL के दूसरे सीजन का पहला मैच, मुंबई इंडियंस बनाम दिल्ली कैपिटल्स।
मैच का रोमांचक मोड़
मुंबई को आखिरी गेंद पर जीत के लिए 5 रन चाहिए थे। कप्तान हरमनप्रीत कौर आउट हो चुकी थीं। पूरा स्टेडियम सन्नाटे में था। सजना पहली बार WPL के मंच पर बल्लेबाजी करने उतरी थीं। गेंदबाज थीं एलिस कैप्स।
सजना ने जैसे ही गेंद का सामना किया, उन्होंने बिना किसी डर के कदम बाहर निकाले और लॉन्ग-ऑन की तरफ एक गगनचुंबी छक्का जड़ दिया। गेंद बाउंड्री के बाहर गिरी और मुंबई इंडियंस मैच जीत गई। पहली ही गेंद पर छक्का मारकर टीम को जिताने वाली वह पहली खिलाड़ी बनीं। उस रात के बाद सजना का नाम हर भारतीय की जुबान पर था। सचिन तेंदुलकर से लेकर हर बड़े क्रिकेटर ने उनकी तारीफ की।
6. सजीवन सजना की खेल शैली का विश्लेषण
सजना एक आधुनिक युग की क्रिकेटर हैं। उनकी खेल शैली में वह सब कुछ है जो एक टी20 स्पेशलिस्ट में होना चाहिए:
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मानसिक मजबूती: आखिरी गेंद पर छक्का मारना उनकी मानसिक दृढ़ता का प्रमाण है। वे दबाव में बिखरती नहीं, बल्कि निखरती हैं।
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पॉवर हिटिंग: उनके पास नेचुरल स्ट्रेंथ है, जिससे वे बड़े छक्के आसानी से लगा सकती हैं।
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विविधतापूर्ण गेंदबाजी: उनकी ऑफ-स्पिन गेंदबाजी में काफी कंट्रोल है, जो उन्हें एक परफेक्ट ‘यूटिलिटी प्लेयर’ बनाती है।
7. परिवार का समर्थन और भविष्य की राह
आज सजना के पिता सजीवन को अपनी बेटी पर गर्व है। सजना ने अपनी पहली कमाई से अपने माता-पिता के लिए खुशियाँ बटोरना शुरू कर दिया है। उनका लक्ष्य अब भारतीय राष्ट्रीय टीम की जर्सी पहनना और देश के लिए वर्ल्ड कप जीतना है। जिस तरह से उन्होंने खुद को साबित किया है, वह दिन दूर नहीं जब वे टीम इंडिया की प्लेइंग-11 का स्थायी हिस्सा होंगी।
निष्कर्ष: संघर्ष से सफलता का सबक
सजीवन सजना की कहानी हमें सिखाती है कि बाधाएं उतनी ही बड़ी होती हैं, जितना हम उन्हें मानते हैं। एक ऑटो चलाने वाले की बेटी अगर अपने दम पर मुंबई इंडियंस जैसी बड़ी टीम को जीत दिला सकती है, तो दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है। सजना आज केवल एक क्रिकेटर नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीय युवाओं के लिए एक ‘आइकन’ हैं।
सजीवन सजना: संक्षिप्त परिचय (Table Summary)
| विवरण | जानकारी |
| पूरा नाम | सजीवन सजना |
| जन्म | 4 जनवरी 1995, वायनाड (केरल) |
| भूमिका | ऑलराउंडर (दाएं हाथ की बल्लेबाजी, ऑफ-स्पिन गेंदबाजी) |
| मुख्य टीमें | मुंबई इंडियंस, केरल महिला टीम |
| प्रसिद्धि का कारण | WPL 2024 में आखिरी गेंद पर छक्का मारकर जीत दिलाना |
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