ISL 2025-26 Season: भारतीय फुटबॉल में अनिश्चितता के बाद नई उम्मीद, 14 फरवरी से मैदान पर उतरेगा ‘महाकुंभ’
ISL 2025-26 Season भारतीय फुटबॉल के लिए पिछले 9 महीने किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं रहे। प्रशंसकों का लंबा इंतजार, खिलाड़ियों का डर और प्रशासनिक खींचतान के बाद आखिरकार एक ऐसी खबर आई है जिसने करोड़ों भारतीयों के चेहरों पर मुस्कान ला दी है। केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने आधिकारिक घोषणा की है कि इंडियन सुपर लीग (ISL) का नया सीजन 14 फरवरी, 2026 से शुरू होने जा रहा है। यह फैसला नई दिल्ली में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया, जिसमें AIFF (अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ) और सभी 14 क्लबों के प्रतिनिधि शामिल थे।
अनिश्चितता के काले बादल और 9 महीनों का ‘लकवा’ ISL 2025-26 Season
जुलाई 2025 से ही भारतीय फुटबॉल एक ऐसी स्थिति में था जहाँ किसी को नहीं पता था कि अगला मैच कब होगा। रिलायंस की FSDL और AIFF के बीच मास्टर राइट्स एग्रीमेंट (MRA) के खत्म होने और नए कमर्शियल पार्टनर न मिलने की वजह से लीग को अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया था।
हालात इतने खराब हो गए थे कि सुनील छेत्री, गुरप्रीत सिंह संधू और संदेश झिंगन जैसे दिग्गज खिलाड़ियों ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर फीफा (FIFA) से हस्तक्षेप की मांग की थी। खिलाड़ियों का कहना था कि वे ‘स्थायी लकवा’ (Permanent Paralysis) जैसी स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं। अब खेल मंत्रालय के सीधे हस्तक्षेप के बाद, यह विवाद सुलझता नजर आ रहा है।
नया सीजन, नया फॉर्मेट: क्या बदलेगा इस बार?
चूँकि सीजन पहले ही काफी देरी से शुरू हो रहा है, इसलिए इसके फॉर्मेट में कुछ बड़े बदलाव किए गए हैं ताकि समय की बचत हो सके:
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सिंगल-लेग्ड होम-अवे फॉर्मेट: इस बार टीमें एक-दूसरे के खिलाफ पारंपरिक डबल राउंड-रॉबिन के बजाय ‘सिंगल-लेग्ड’ फॉर्मेट में खेलेंगी। इसका मतलब है कि हर टीम सभी दूसरी टीमों से भिड़ेगी, लेकिन कुल मैचों की संख्या सीमित रहेगी।
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91 रोमांचक मुकाबले: पूरे सीजन के दौरान कुल 91 मैच खेले जाएंगे। यह फॉर्मेट इसलिए चुना गया है ताकि क्लबों को अपने ‘होम ग्राउंड’ पर खेलने का मौका मिले और उनके लोकल स्पॉन्सर्स और टिकट रेवेन्यू को नुकसान न हो।
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14 क्लबों की भागीदारी: अच्छी खबर यह है कि सभी 14 क्लब (जिसमें SC Delhi और Inter Kashi जैसे नए नाम भी शामिल हैं) इस सीजन का हिस्सा होंगे।
आर्थिक संकट और ₹25 करोड़ का मास्टर प्लान
लीग के पास वर्तमान में कोई बड़ा कमर्शियल पार्टनर या ब्रॉडकास्टर नहीं है, जो एक बड़ा वित्तीय जोखिम था। इसे संभालने के लिए AIFF अध्यक्ष कल्याण चौबे ने एक विशेष वित्तीय योजना पेश की है:
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सेंट्रल पूल: लीग के संचालन के लिए ₹25 करोड़ का एक ‘सेंट्रल पूल’ बनाया गया है।
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AIFF का बड़ा योगदान: इस फंड का 10% हिस्सा AIFF देगा, जबकि बाकी का 30% हिस्सा भी फिलहाल फेडरेशन ही उठाएगा जब तक कोई नया पार्टनर नहीं मिल जाता। कुल मिलाकर AIFF करीब ₹14 करोड़ खर्च करेगा।
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I-League का भविष्य: ISL के साथ-साथ I-League भी फरवरी में ही शुरू होगी, जिसके लिए ₹3.2 करोड़ का बजट अलग से रखा गया है।
क्लबों की चिंता और सुलह का रास्ता
शुरुआत में क्लब इस बात को लेकर चिंतित थे कि अगर लीग बिना किसी ठोस प्लान के शुरू हुई, तो उन पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा। नॉर्थईस्ट यूनाइटेड के सीईओ मन्दार ताम्हाणे और अन्य क्लब प्रतिनिधियों ने मांग की थी कि इस बार कोई ‘पार्टिसिपेशन फीस’ न ली जाए। सरकार और AIFF ने क्लबों की बात मानते हुए उन्हें वित्तीय सुरक्षा का भरोसा दिया है।
केरल ब्लास्टर्स, मोहन बागान और ईस्ट बंगाल जैसे क्लबों के लिए होम मैच खेलना सम्मान और आर्थिक स्थिरता, दोनों के लिए जरूरी था। नया फॉर्मेट इन क्लबों को अपने प्रशंसकों के बीच जाकर खेलने की अनुमति देता है, जो इस संकट काल में सबसे अच्छा समाधान (Cost-Effective Solution) माना जा रहा है।
निष्कर्ष: क्या यह भारतीय फुटबॉल का ‘रिबूट’ बटन है?
14 फरवरी (वैलेंटाइन डे) पर फुटबॉल की वापसी केवल एक टूर्नामेंट की शुरुआत नहीं है, बल्कि यह उन खिलाड़ियों और प्रशंसकों की जीत है जिन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी थी। हालांकि, असली चुनौती लीग के खत्म होने के बाद शुरू होगी—क्या AIFF एक स्थायी कमर्शियल पार्टनर ढूंढ पाएगा? क्या भारतीय फुटबॉल फिर से उसी रफ़्तार से आगे बढ़ पाएगा? इन सवालों के जवाब आने वाला समय देगा, लेकिन फिलहाल के लिए, फुटबॉल की वापसी ही सबसे बड़ा जश्न
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